लोग अक्सर मुझसे पूछते हैं कि आपने अपने ब्लॉग का शीर्षक "Sense of Nonsense" क्यों रखा। इसका जवाब है कि इस दुनिया के लोगों को सीधी बातें कम समझ आती हैं। अगर आप सही बात किसी को बताने चलें तो लोग आपको ही पटटी पढाने लग जायेंगे । फिर हमारे भारत देश में तो हर आदमी अपने आप को एक्सपर्ट समझता है। यहाँ हर आदमी हर क्षेत्र में महारथी है क्यों कि उसने दुनिया देखी है एक खास नज़र से, जो आप ने नही देखी। यहाँ आपको बिन मांगे बहुतेरे सलाहकार अर्थात consultants मिल जायेंगे। मेरे एक प्रोफ़ेसर हैं, प्रोफ़ेसर सिन्हा, वो कहा करते हैं। Thsoe who can they do, who can't, they teach. और मेरा कहना है कि Those who neither can do nor teach, they become consultants and make others' life miserable by giving 'valuable advice on premium price'. मैंने शायद ज़िन्दगी में कभी सोचा नही था कि मैं मनोविज्ञान का प्रोफ़ेसर बनूँगा और मैनेजमेंट विद्यालयों में OB नामक विषय विद्यार्थियों को पढाऊंगा। पर शायद यही मेरी नियति थी। मगर मैनेजमेंट पढाते पढाते लगता है अपनी भी बुद्धि भ्रष्ट हो गयी है। इसलिए अब सोचता हूँ कि एक नया course, Nonsense Management के नाम से पढाना शुरू कर दूँ। Perhaps then, I may talk something sensible to my students and do some sense-making research.
शोध जारी है।
Friday, August 7, 2009
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