Wednesday, April 8, 2009

Panwaadee ki Duniya

किसी ने सही कहा है कि पनवाडी कत्था, पान, चूना, सुपारी से आगे नही सोच सकता क्योकि उसने पूरी ज़िंदगी में वही देखा है। ये बात हम सभी पर लागू होती है। मैं अपने पूरे सोशल सर्कल में अपने जुमलो के लिए जाना जाता हूँ और मेरे जुमले सभी को घायल कर देते है। एक प्रोफ़ेसर होने के नाते मेरे ये जुमले कभी कभी बड़ा सटीक वार कर देते है, इसी कारण से मेरे कई मित्र और परिवार वाले मुझसे दस कदम दूर रहते है। अब जब मैंने ये ब्लॉग लिखना चालू कर ही दिया है, तो सोचा कि अपने पुण्य विचारों से इंटरनेट की दुनिया के लोगो को क्यों मोहताज़
रखा जाए। क्लास में तो विद्यार्थी मेरी बात सुनते नही है, शायद इंटरनेट पर
कुछ सरफिरों को मेरी बेसिर पैर की बातें समझ आ जायें। तभी तो मैंने अपने ब्लॉग का नाम सेंस ऑफ़ नॉन-सेंस रखा है। आज के लिए इतना ही, बाकी बाद में।